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CUET UG में नॉर्मलाइजेशन खत्म, OMR शीट पर परीक्षा, जानें क्या-क्या बदलेगा

CUET UG में नॉर्मलाइजेशन खत्म, OMR शीट पर परीक्षा, जानें क्या-क्या बदलेगा

CUET UG 2024 : कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट-अंडरग्रेजुएट (CUET UG)-2024 में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. जिसमें मार्क्स के नॉर्मलाइजेशन की व्यवस्था को समाप्त किया जाना एक है.

CUET UG 2024
CUET UG 2024

यह बदलाव नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए करने वाली है. समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार यह जानकारी शीर्ष अधिकारियों ने दी है. दरअसल प्रत्येक परीक्षा सत्र में उम्मीदवारों को प्रश्न पत्र के अलग-अलग सेट दिए जाते हैं. हालांकि एनटीए प्रश्न पत्रों को समान स्तर का बनाने का पूरा प्रयास करता है, लेकिन यह संभव है कि किसी पाली में उम्मीदवारों को परीक्षापत्र में कुछ कम कठिन प्रश्न मिलें, वहीं किसी पाली में उम्मीदवारों को कुछ कठिन प्रश्नों का सामना करना पड़े. इसके कारण संभव है कि ऐसे उम्मीदवार अन्य उम्मीदवारों की तुलना में अपेक्षाकृत कम अंक प्राप्त करें. इस समस्या को दूर करने और परीक्षा में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए, एनटीए प्रतिशत स्कोर के आधार पर अंकों की 'यूजीसी नेट सामान्यीकरण' व्यवस्था को अपनाता है.

एक महीने तक नहीं चलेगी परीक्षा

अभी तक यह परीक्षा कम से कम एक माह तक चलती थी. अब इसके कम अवधि में संपन्न कराए जाने की भी संभावना है क्योंकि एजेंसी 'ओएमआर शीट' और कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने की योजना तैयार कर रही है. इससे सुनिश्चित होगा कि अधिकतर छात्रों को अपनी पसंद के शहर में परीक्षा देने का मौका मिले.

ओएमआर शीट पर हो सकती है परीक्षा

यूजीसी के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने कहा है कि बड़ी संख्या में पंजीकरण कराए जाने पर एनटीए ओएमआर मोड में परीक्षाएं आयोजित करने की संभावना पर विचार कर रहा है. इससे हमें परीक्षा केन्द्र बनाने के लिए बड़ी संख्या में स्कूलों का चयन करने में मदद मिलेगी. इससे सुनिश्चित होगा कि छात्रों को अपने शहरों अथवा कस्बों में ही परीक्षा केन्द्र मिल जाएं और उन्हें दूर नहीं जाना पड़े. उन्होंने कहा कि जिन विषयों के लिए अधिक आवेदन प्राप्त होंगे, उनके लिए परीक्षा 'पेन-पेपर मोड' में आयोजित करने, जबकि कम संख्या में आवेदन प्राप्त होने पर केवल कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने की पद्धति से यह सुनिश्चित होगा कि पिछले दो वर्ष से भिन्न सीयूईटी-यूजी परीक्षा कम अवधि में आयोजित की जा सकेंगी. हाइब्रिड मोड सभी के लिए समान अवसरों को बढ़ावा देता है और यह सुनिश्चित करता है कि भौगोलिक बाधाएं ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में छात्रों की शैक्षिक आकांक्षाओं में बाधा न बनें. उन्होंने कहा कि एक ही दिन में एक विषय की परीक्षा आयोजित करने से 'अंकों के सामान्यीकरण' की व्यवस्था की आवश्यकता खत्म हो जाएगी.

इस बार होंगे छह पेपर

यूजीसी के चेयरमैन का कहना है कि इस वर्ष छात्रों को 10 पेपर देने के बजाय अधिकतम छह पेपर लिखने की अनुमति दी जाएगी. इस निर्णय के पीछे तर्क यह है कि पिछले वर्ष परीक्षा में केवल कुछ ही छात्रों ने 10 पेपर देने का विकल्प चुना था लेकिन पूरी प्रक्रिया जटिल हो जाती है और कई दिन तक परीक्षा आयोजित की जाती है. आवेदकों की संख्या के हिसाब से यह देश में दूसरी सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा है.

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